"पंछी बचाओं" हिंदी कविता - अनुराग निम्भल | Panchhi Bachao Hindi Poem
पंछी बचाओं
कवि - अनुराग निम्भल
परम-पिता-परमात्मा ने
अनंत जगत में पंछी उतारे,
कोमल एकदम फूलों से
सुरंग पंखों से संवारे,
आंखे इनकी मोती जैसी
तारों-सी चमक लुभानी,
कहर रूपी प्रदूषण सुनामी
ने खेचर की जिंदगी थामी।
वात तटिनी सब है मैली
बदल गई कलयुग की शैली,
कांतार सब कटते जाए
नभचर घर अब कहा बनाए,
टेलीफोन के टावर बड़े
रास्ता ये घेरे खड़े,
छोड़ रहे विद्युत लपटे
जो खग के प्राणों को झपटे।
ब्यार चली प्रदूषण वाली
लुप्त हो रहे है ये आली,
इंसानों के लालच से
सूनी हुई वृक्षों की डाली,
कब तक यूं अन्याय करोगे
अब सब मिलके कदम उठाओ,
करो विचार ज़रा पक्षियों पर
कृपया इनके प्राण बचाओ।

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